पटना: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन [CPI(ML)] के विधायक संदीप सौरव छात्र आंदोलन से जुड़े मामले में बेऊर जेल से रिहा होने के बाद एक बार फिर सरकार पर हमलावर दिखे। जेल से बाहर निकलते ही उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि यह सिर्फ शुरुआत है। उनका दावा है कि छात्रों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी और जरूरत पड़ने पर इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
छात्रों के संघर्ष को बताया बड़ी जीत
जेल से बाहर आने के बाद मीडिया से बातचीत में संदीप सौरव ने कहा कि यह छात्रों के संघर्ष की जीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान छात्रों के साथ दमनात्मक कार्रवाई की गई, लेकिन आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों के आंदोलन का परिणाम है, हालांकि उनका मानना है कि केवल इस्तीफे से व्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा और इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा।
जेल के अनुभव पर भी की चर्चा
संदीप सौरव ने बताया कि जेल के भीतर उनका अनुभव सामान्य रहा। उन्होंने कहा कि वहां अखबार और टीवी की सुविधा उपलब्ध थी, जिसके माध्यम से उन्हें देश की घटनाओं की जानकारी मिलती रही। उन्होंने बताया कि जेल में रहते हुए ही उन्हें धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जानकारी मिली, लेकिन उनका मानना है कि असली बदलाव के लिए अभी लंबी लड़ाई बाकी है।
रिहा हुए छात्रों ने भी साझा किए अनुभव
संदीप सौरव के साथ रिहा हुए कई छात्रों ने भी जेल में बिताए समय को लेकर अपनी बातें साझा कीं।
अमन कुमार लाल ने कहा कि जेल एक तरह की “यूनिवर्सिटी” की तरह है, जहां काफी कुछ सीखने को मिला। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों पर दोबारा कार्रवाई हुई तो वे फिर आंदोलन करेंगे।
सकीब ने बताया कि जेल प्रशासन को पता था कि वे छात्र हैं, इसलिए उनके साथ अच्छा व्यवहार किया गया।
नैतिक और सोनू कुमार ने कहा कि उन्हें जेल में अखबार पढ़ने का मौका मिला, जिससे उन्हें आंदोलन से जुड़ी खबरों और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जानकारी मिली।
दिशा संगठन के छात्र नेता आशीष का हुआ स्वागत
इस मामले में दिशा संगठन के छात्र नेता आशीष भी जेल से रिहा हुए। जेल के बाहर उनके समर्थक ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और नारों के साथ पहुंचे। सभी रिहा हुए छात्रों और नेताओं का जोरदार स्वागत किया गया। कई परिजनों ने भी रिहाई पर खुशी जताई।
FIR को लेकर उठा नया विवाद
इस बीच आंदोलन से जुड़ी एफआईआर को लेकर भी विवाद सामने आया है। किशनगंज निवासी मोहम्मद सदाकत कोनन राही ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया कि वे पिछले चार महीने से रूस में हैं और प्रदर्शन वाले दिन भी भारत में नहीं थे। इसके बावजूद उनका नाम एफआईआर में शामिल कर दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और एफआईआर की समीक्षा की मांग की है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
NEET पेपर लीक को लेकर बिहार में हुए छात्र आंदोलन ने राज्य की राजनीति को भी प्रभावित किया। आंदोलन के दौरान कई छात्र नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई, जिनमें CPI(ML) विधायक संदीप सौरव भी शामिल थे। अब उनकी रिहाई के बाद आंदोलन को लेकर नए राजनीतिक बयान सामने आ रहे हैं। दूसरी ओर, एफआईआर और गिरफ्तारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जिससे यह मुद्दा अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
आगे क्या?
संदीप सौरव और रिहा हुए छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे आंदोलन को समाप्त नहीं मानते। उनका कहना है कि छात्रों की मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा। वहीं प्रशासन की ओर से मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है और दर्ज मामलों की जांच जारी है।